“जयस” यानी जय के साथ यश भी आदिवासियों की आन बान शान भी.

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उमाकांत शर्मा  11 अगस्त  बैतूल जयस जैसा नाम वैसा ही आदिवासियों की आन बान शान.  जयस जय के साथ यश यानि जैसा नाम वैसी आदिवासियों की आन बान शान  भी है जयस ने यह सिद्ध भी कर दिया. सरदार विष्णु सिंह गोंड की मूर्ति के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में जिला मुख्यालय मे 11 अगस्त को जिलेभर से उपस्थित आदिवासियों ने भव्य ऐतिहासिक रैली निकाली. एक अनुमान के अनुसार लगभग 50 से 60 हजार लोगों ने जिला मुख्यालय की रैली में हिस्सा लिया, इसके अलावा पूरे जिले भर में जगह-जगह आदिवासियों की रैली निकली, जिला मुख्यालय की रैली का भव्य आयोजन जयस के जिला अध्यक्ष भैसदेही विधानसभा से जिला पंचायत सदस्य संदीप धुर्वे एंव घोड़ाडोंगरी विधानसभा के जयस जिला संरक्षक चंद्रशेखर ऊर्फ राजा धुर्वे (भौरा) के द्वारा किया गया. पूरे कार्यक्रम की कमान सुनील करोचे,जामवंत कुमरे,महेश शाह उइके,राजकुमार काकोडिया, डोमासिंह कुमरे रितिक परते,दिलीप पंद्राम,कपिल मार्सकोले,संदीप उइके,रामदीन इवने, मनीष परते,और जयस के अन्य साथियों द्वारा सम्भाली गई. “जयस की भव्य रैली के निकाले जा रहें रहें राजनीतिक कयास” …. . जयस के द्वारा सरदार विष्णु सिंह गौड़ की मूर्ति की स्थापना जिला मुख्यालय में 3 वर्ष पूर्व आज ही के दिन की गई थी, जानकारों की माने तों स्थापना दिवस सिर्फ एक बहाना था,दरअसल जयस को जिले में अपनी आदिवासी युवा शक्ति का प्रदर्शन करना हो सकता है. जिस उत्साह से आदिवासीयों ने इस रैली में भाग लिया उससे कांग्रेस और भाजपा की जड़े हिल गई है. अपार जनसमूह का भारी उत्साह देखते हुए इस बार यह तो निश्चित हो गया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में जिले का आदिवासी चुनाव का निर्णय करेगा अभी यह स्थिति स्पष्ट नहीं है कि जयस कांग्रेस या भाजपा या स्वयं के बलबूते पर चुनाव लड़ेगा किंतु यह एकदम स्पष्ट है कि चुनाव तो जरूर लड़ेगा. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जयस संगठन के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने न्योता देकर भोपाल बुलाया था. लेकिन अभी तक बात फाइनल स्थिति में नहीं है. बैतूल जिले की दो विधानसभा सीटों पर जयस निर्णायक स्थिति में रहेगा पहले सीट है भैंसदेंही विधानसभा एंव दूसरी है घोड़ाडोंगरी इन दोनों ही विधानसभा में आदिवासी वोटो की संख्या ज्यादा है भाजपा एवं कांग्रेस से रुष्ट लोग भी जयस को समर्थन कर सकते है. यह सब आदिवासियों की एकता पर निर्भर रहेगा देखना यह होगा कि आने वाले चुनाव तक जयस अपने वोटरों को संभाल कर रख सके. क्योंकि दोनों ही प्रमुख दल आदिवासियों के बीच सेंधमारी का काम लगातार करेंगे.


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