15 मार्च बैतूल
सूत्रों के अनुसार दो खिलाड़ी जिन्होंने पुलिस की नाक में द
म कर रखा है गोलू रखोर और प्रकाश चौकीदर इन दोनों जुआरियो ने टीम बनाकर जिले के अलग अलग क्षेत्रों जुआ खिलाने का पुराना धंधा नये स्वरूप में चालू किया है.
ये कोई मामूली जुआरी नहीं, बल्कि ‘ जिले में जुआ के बेताज बादशाह है फिलहाल पुलिस को हर चाल में मात देते नजर आ रहे हैं। इनका ‘साम्राज्य’ किसी आलीशान अड्डे पर नहीं, बल्कि गाड़ियों के पहियों के भरोसे जंगल क्षेत्र के गांव में चलता है। आज भैंसदेही में, तो कल सातनेर के सुनसान इलाकों में, और परसों महाराष्ट्र की सीमा पर… इनकी महफिलें हर दिन नई जगह तलाशती हैं।
‘ऑपरेशन फुर्र’: पुलिस आती, ये गायब हो जाते!
इनकी कार्यप्रणाली इतनी चालाक है कि इसे ‘ऑपरेशन फurrr’ का नाम दिया जा सकता है। जैसे ही पुलिस की टीमों को इनके गुप्त ठिकानों की भनक लगती है और वे दबिश देने पहुंचती हैं, गोलू और प्रकाश अपनी पूरी गैंग के साथ हवा हो जाते हैं। पीछे रह जाती हैं सिर्फ ताश की गड्डियां और बिछी हुई दरियां, जो पुलिस को मुंह चिढ़ाती सी लगती हैं। जिले की सीमाएं इनके लिए कोई मायने नहीं रखतीं; इनका नेटवर्क पड़ोसी राज्य के जिलों तक फैला है, जहाँ ये कानून को ठेंगा दिखाकर लाखों के दांव खिलवाते हैं।
नया पैंतरा: ‘इल्जाम किसी पर, निशाना कहीं और’
जब पानी सिर से ऊपर जाने लगता है, तो ये जोड़ी एक नया और खेल शुरू करती है। ये पुलिस और मीडिया को गुमराह करने के लिए इलाके के कुछ पुराने, घिसे-पिटे जुआरियों का नाम उछाल देते हैं। फिर खुद ही उनके नाम से खबरें प्लांट करवाते हैं, ताकि पुलिस का ध्यान असली मास्टरमाइंड से भटक जाए और वे जांच के जाल में उलझ कर रह जाएं। यह एक सोची-समझी साजिश है जिसका मकसद है खुद को पाक-साफ दिखाकर पुलिस विभाग की साख पर बट्टा लगाना।
क्या टूट पाएगा यह ‘मायाजाल’?
यह जोड़ी बैतूल पुलिस के लिए एक खुली चुनौती बन गई है। सवाल यह है कि क्या पुलिस इन ‘अदृश्य’ जुआ किंगों के मायाजाल को भेद पाएगी? या ये दोनों यूँ ही कानून के साथ आंख-मिचौली का खेल खेलते रहेंगे?