अवैध शराब के विरुद्ध बैतूल पुलिस व आबकारी की संयुक्त बड़ी कार्रवाई

आबकारी विभाग की दोहरी नीति विचित्र किन्तु सत्य

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उमाकांत शर्मा     बैतूल 10 मई पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज सोनी एसडीओपी सृष्टि भार्गव द्वारा जिले में चलाए जा रहे अवैध शराब एंव जुआ सट्टा के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत 10 मई को बैतूल पुलिस जिसमें कोतवाली गंज रक्षित केंद्र बेतूल एवं आबकारी विभाग के श्री अशोक माहौरे,सुरेंद्र देवांगन गौरव पांडे की संयुक्त टीम गठित कर सोनाघाटी पारधी ढाना, कोठी बाजार पारदी ढाना, एवं हर्रा ढाना गांव मैं दबिश देकर क्रमशः 1000 किलोग्राम, 2000 किलोग्राम 2000 किलोग्राम कुल 5000 किलोग्राम महुआ लहान मिली जिसे मौके पर सैंपल लेकर आबकारी व पुलिस विभाग द्वारा नस्टी करण की कार्रवाई की गई. तथा आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 341 क, च के तहत 3 प्रकरण दर्ज किए गए हैं हालांकि पुलिस ने किन लोगों के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं यह स्पष्ट नहीं है.

 *आबकारी विभाग का दोहरी नीति *                       आबकारी विभाग की भूमिका कई जगह स्पष्ट नहीं          आज तक ज्यादातर देखने मे यह आया है कि पुलिस के साथ मिलकर आबकारी विभाग ने अवैध कच्ची  शराब बनाने व बेचने वालों के ही खिलाफ कार्यवाही की है किंतु आबकारी विभाग के द्वारा संचालित जिलेभर की दुकानों के ठेकेदार गांव-गांव अवैध शराब का परिवहन कर बेचते हैं. उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है.  क्योंकि आबकारी की इसमें मौन सहमति होती है. इन शराब माफियाओं के पास बकायदा हथियार बंद गुंडों की एक टीम होती है जो पूरी तरह गैर कानूनी है, ग्रामीणों के घर जबरन घुसकर तोड़फोड़ करना उनके घरों के अंदर तक दबिश देना यहां तक की बेरहमी से मारपीट करना महिलाओ से अभद्रता,छेड़छाड़ तक शामिल है जिलेभर में ऐसी कई घटनाएं घट चुकी हैं. गांव-गांव शराब का अवैध परिवहन करना एक दुकान ठेके पर लेकर सैकड़ों गांव में  अपनी ब्रांच तक शराब पहुंचाने का काम किया जा रहा है जिससे नस्लें खराब हो रही है आबकारी विभाग को कम से कम इस ओर भी ध्यान देना ही चाहिए  ठेकेदारों से रिश्तेदारी  बंद होनी चाहिए


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