बंगालियों कों भी एस.सी. एंव ओबीसी वर्ग मे शामिल किया जावे.

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उमाकांत शर्मा.   कुछ गंभीर मुद्दे है जों अनदेखी मे छूट जाते है..इनकी ओर किसी का ध्यान भी नहीं जाता, वैसे तो लगातार 15 वर्ष से निवास कर रहें लोगों कों मूल निवासी मान कर उनका प्रमाण पत्र जारी प्रमाणित कर दिया जाता है, किन्तु कई दसको से चोपना एंव मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों मे निवासरत विस्थापित बंगाली समाज की सबसे प्रमुख समस्या यह है कि , बंगालियों मे नाई, बढ़ई, कुम्हार, लोहार, स्वर्णकार,मांझी, मछुआरा,जैसे और भी जातियों के लोग होने के बावजूद sc एवं obc का जाति प्रमाण पत्र नही दिया जा रहा है। सभी बंगालियों कों सामान्य जाती का माना गया है, यह न्यायोचित नहीं जबकि क्षेत्रीय लोगों के विभिन्न जातियों के लोगो के जाति प्रमाण पत्र बनते आ रहे है।  ऐसे मे बंगाली समाज के लोग  शासन क़ी योजनाओं  के लाभ लेने से वंचित  हो जाते है.

शुभम सोशल फाउंडेशन सोसायटी ने इस मामले मे बताया कि बंगालियों के साथ पिछले 50 वर्षो से भेद भाव हो रहा है। किसी भी दल या नेता को याद रखना चाहिए कि म. प्र. मे बंगालियों संख्या 10 लाख से भी अधिक है अब वे पं. बंगाल या (पूर्वी पाकिस्तान) बांग्लादेश के निवासी नही, बल्कि मध्यप्रदेश के मूल निवासी है। भाषा या समाज के नाम पर भेदभाव करने का किसी को भी अधिकार नही है। बंगाली नाई या कुम्हार को इसलिए जाति प्रमाण पत्र नही दिया जाता क्योंकि वह बंगाली है, यह भेदभाव नही तो और क्या है ? सोसायटी के सचिव बिकास बोस ने बताया कि मिडिया के माध्यम से शासन और प्रशासन का ध्यान बंगाली समाज कि ओर आकर्षित कराते रहने के लिए आगे भी लगातार क्रिया कलाप जारी रखने का निर्णय लिया है.इस विषय पर उनकी सोसायटी ने मुख्यमंत्री कों पत्र लिख कर प्रतिनिधि मंडल के साथ मिलने का समय मांगा है.


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