कौन लील गया पूर्व विधायक का राजनीतिक जीवन_सुभाष राठौर बैतूल

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16 नवंबर  बैतूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और क्षत्रिय राठौर समाज के जिला अध्यक्ष सुभाष राठौर ने विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि बैतूल पूछ रहा है कि वरिष्ठ भाजपाइयों को घर किसने बैठाया ।साफ सुथरी छवि के वरिष्ठ नेता,पूर्व विधायक शिव प्रसाद राठौर को आगे क्यों नहीं बढ़ने दिया, वो कौन सा भाजपा नेता है जिसने श्री राठौर का राजनीतिक भविष्य खत्म कर उन्हें राजनीति में गुमनामी का जीवन जीने पर मजबूर कर दिया।भाजपा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले राजा ठाकुर को जिला पंचायत का अध्यक्ष आखिर क्यों नहीं बनने दिया गया,भाजपा के चाणक्य वरिष्ठ भाजपा नेता सदन आर्य आज कहां है । ऐसे सैकड़ो योग्य ,काबिल और वरिष्ठ भाजपा नेता आज भाजपा प्राइवेट लिमिटेड के कारण घर बैठ गए हैं ।

श्री राठौर ने कहा कि करीब 30 साल से किसी भी व्यक्ति को आगे नहीं आने दिया गया। जिसने भी आगे आने की कोशिश की उसे दूध में मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया गया। क्यों बड़े और पुराने नेताओं को घर बैठा दिया।

चुनाव जीतने के बाद भी शिवप्रसाद राठौर और अलकेश आर्य सरीखे जननेताओं की टिकट कटवाई लेकिन ऐतिहासिक हार के बाद आज खुद ने फिर टिकट ले ली।अनारक्षित होने के बाद सामान्य वर्ग से धोखेबाजी की और जिला पंचायत अध्यक्ष का और नगरपालिका बैतूल का पद आरक्षित वर्ग को दिया। लेकिन विधायक की टिकट खुद के लिए तय कर कुंबी और ओबीसी समाज को लालीपाप पकडाया।

जिला पंचायत और नगरपालिका में जिनको बैठाया उनको भी खुलकर काम नहीं करने दिया। अधिकारियों और पार्षदों के माध्यम से उनके लिए दिक्कत खड़ी की गई और बुजुर्ग अध्यक्ष के बेटे के खिलाफ सोशल मीडिया में अनाप शनाप पोष्ट करवाई गई ।

श्री राठौर ने कहा कि अपनी पुरानी टीम पर बिकने का आरोप लगाकर उनको बेइज्जत किया और आनंद प्रजापति सरीखे हमेशा विजेता रहने वाले नेता को पहले पार्षद के टिकट के लिए लटकाया बाद में उन्हें भी पार्षद तक ही सीमित कर दिया । विनय भावसार सरीखे कर्मठ मित्र को भी एक बार सहकारी बैंक का अध्यक्ष बनाकर हाशिए में रखा। यही हाल राजू पवार,राजेश आहूजा अतीत पवार आदि के साथ किया।

आज पुराने नेताओं को चुनाव में अपना नाम आने के बाद पूछा गया। मंच पर बैठाकर सम्मान किया गया। वरना 25 साल इन्हीं नेताओं को विजय भवन में घुसने तक नहीं दिया गया। राजीव खंडेलवाल, सुभाष आहूजा, राजा ठाकुर, जितेंद्र कपूर, सदन आर्य, प्रवीण गुगनानी सहित ऐसी लंबी फेहरिस्त है जिन्हें कभी नहीं पूछा बल्कि इनको और इनके परिवार को पुलिस प्रशासन के माध्यम से प्रताड़ित करने का हमेशा प्रयास किया गया। अब उन सभी को झूठा आश्वासन देकर फिर जोड़ने का प्रयास कर रहे लेकिन वे सभी अपनी बेइज्जती को भूले नहीं हैं।

भाजपा के विभिन्न पदों पर कभी किसी योग्य व्यक्ति को मौका नहीं दिया गया। एकमात्र जीते विधायक डा योगेश पंडागरे को भी हमेशा हाशिये पर रखने की कोशिश की गई। डिप्टी कलेक्टर के माध्यम से उनको परेशान करवाया। खुद के बिना यदि कोई भी कार्यक्रम होता है तो उसमें अड़ंगा डालना जग जाहिर है। राजा ठाकुर को पहले अध्यक्ष नहीं बनने दिया फिर उन्होंने जब पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा कराई तो उसमें जगह व्यवस्था को लेकर खूब परेशानियां खड़ी करवाई गई। एक भी आदिवासी नेता को आगे नहीं आने दिया। दो बार की सांसद रही ज्योति धुर्वे को घर बैठाया तो डीडी उइके को भी काम नहीं करने दिया।


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