निशा बांगरे विरोधियों के लिये कठिन सबजेक्ट है.

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उमाकांत शर्मा   24 जून    बैतूल  ” निशाचर ” कूद कूद के निकल रहें है उछल रहें है , रास्ता रोकने तमस्वनि का. कुछ छोटे नटखट बच्चों को भी कभी-कभी अंधेरा और आधी रात डरावनी लगती है, लेकिन ” निशा ” को नहीं।
भारतीय संविधान की शपथ लेकर डिप्टी कलेक्टर बनने वाली निशा बांगरे, फिर भारतीय संविधान  को साक्षी मानकर विवाह के बंधन में बंधने वाले  निशा व  उनके  इंजिनियर पति सुरेश अग्रवाल  पेपर की सुर्खियों में भारतीय समाज के लिए एक मिसाल बने थे, डिप्टी कलेक्टर निशा का आमला प्रेम अपनी नौकरी से ज्यादा प्यारा है. तभी तो अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है,ये अलग बात है कि उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ है.

नौकरी को लात मारने वाली बात निशा ने कभी की ही नहीं  25 जून को  आमला  मे होने वाले  सर्वधर्म सम्मेलन कार्यक्रम के लिये उन्होंने आमला मे बने अपने गृह मे प्रवेश वाले कार्यक्रम व सर्वधर्म सम्मेलन मे सम्मिलित होने के लिये एक विधिवत आवेदन निवेदन शासन से किया है. जो एक विशिष्ट शिष्टाचार गुणवत्ता धारी ही कर सकता है..

इसमें कोई शक नहीं है की वें चुनाव नहीं लड़ेंगी? किंतु ऐसा उन्होंने कभी कहा नहीं है. उनकी तैयारियों को देखते हुए अनायास ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि निशा आंमला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी. उनके आमला क्षेत्र में सक्रिय होते ही कुछ लोगों की बेमतलब भौहें तन गई है. हालांकि यह सब निशा को फायदा ही पहुंचा रहें है.
आंमला विधानसभा एस.सी. बाहुल्य होने के साथ-साथ इस विधानसभा का शैक्षणिक स्तर भी अच्छा है. विधानसभा के प्रत्येक गांव में पढ़े लिखे लोगों की संख्या ज्यादा है और वे एक उच्च शिक्षित व्यक्ति को अपना लीडर बनाते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी से एक उच्च शिक्षित उम्मीदवार डॉ योगेश पंडाग्रे को जनता ने विधायक चुना.
निशा यदि आंमला विधानसभा से चुनाव लड़ने का मन बनाए तो वें निश्चित ही अपने प्रतिद्वंदी को कड़ी टक्कर देंगी. निशा को पॉपुलर होने या करने में सबसे ज्यादा भूमिका स्वउपजे विरोधियों की हैं पब्लिसिटी के लिए आज लोग न जाने क्या-क्या करते हैं किंतु निशा को उनके स्वउपजे विरोधियों ने भी उनका सम्मान रखते हुए यह कार्य भी स्वयं कर दिया है.

वें चुनाव लड़ेंगी या नहीं लड़ेंगी यह स्पष्ट नहीं है यदि लड़े तो वह किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगी इसके सार्थक अनुमान के लिए बैतूल में एग्जिट पोल चालू हो चुका है. नारी सम्मान की बात करने वालों से एक सवाल तो बनता है कि एक उच्च शिक्षित महिला के लिये इतना प्रोपेगेंडा आखिर क्यूं, ? खैर जो भी हो निशा अपने प्रत्येक मकसद में कामयाब होते हुए तो दिख रही हैं.


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