खसरा नंबर 119 हाजिर हो?

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चोपना / बैतूल:  12अप्रेल चोपना से प्राप्त जानकारी के अनुसार  खसरा नम्बर 119  चोपना ग्राम की सबसे चर्चित शासन की भूमि है  किन्तु इसे लेकर घोड़ाडोंगरी तहसील के अधिकारीयों की भूमिका संदिग्ध नजर आती है आपको पहले बता दें कि खसरा नंबर 119 शासकीय भूमि है पशु चारगाह घास की भूमि है जो कि पुराने रिकार्ड मे दर्ज है. फिर कुछ समय बाद इसमें पटवारी अपना जादू का खेल दिखाकर अपने तत्कालीन आका (तहसीलदार )  के हस्ताक्षर से इसके दो टुकड़े करता है  यानी अब 119/2  का भव्य अवतार होता है. इस 119 /2 का मालिक एक शासकीय एंव जिम्मेदार सेवक को बनाया जाता है नाम है दिलीप . इसी दौरान शासकीय जमीन पर अतिक्रमण करने कि घोर लालसा पालने वाले राय परिवार भी इसमें शामिल है अशोक राय एंव सुशील व्यापारी द्वारा तो सारी हदे पार कर  आने जाने का रास्ता बंद कर पक्का निर्माण करने लगें है. खसरा नंबर 118 एंव अन्य लोगों को आना जाना तक इन लोगों ने प्रतिबंधित कर दिया है. आवेदको को कई सालों से परेशान होना पड़ रहा  है अपनी स्वयं की भूमि को कब्जाते हुए तहसील के नुमाइंदे दर्शक की भूमिका मे है.

वे अतिक्रमणकारियों से निवेदन कर रहें है भगवान के नाम पर हमें हमारी शासकीय भूमि लौटा दें रे  अतिक्रमणकारी .   चोपना गांव के एक ग्रामीण कल चर्चा कर रहें थे की तहसील मे पुकार लगी खसरा न 119 हाजिर हो  तो माहौल यह था की 119 जाय या 119/2 अब साहब के सामने बिना घास का 119 उपस्थित हुआ  119/2 अभी सरकारी स्कूल मे फार्म भर रहा है.  …….  तहसीलदार साहब ग्रामीणों का कहना है की 119 का अस्तित्व बचा दो  नहीं बचा सकते तो  आने जाने  की रास्ता ही उपलब्ध करवा दो . इस मामले मे रास्ता देनेमे आने वाले अतिक्रमण को हटाने के कई बार आदेश हो चुके है किन्तु आपके पटवारियों का अतिक्रमणकरियों के साथ अटूट प्रेम इस काम मे बाधा बन रहा है. चोपना एंव उसके आस पास के हल्को के पटवारियों की गतिविधियों पर ध्यान देने के साथ एक बार इनके कारनामो का सूक्ष्म निरिक्षण कर लेवें, आशा  ही नहीं पूर्ण विश्वास है की वे कसौटी  मे खरे नहीं उतरेंगे,खैर वो करना न करना आपके हाथ मे है पर  119 का अस्तित्व बचा  लीजिये .खबर  का माध्यम जनचर्चा है.


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