उमाकांत शर्मा : शराब माफिया, भू माफिया. रेत माफिया, शिक्षा माफिया, राजनीति माफिया, समाजिक माफिया,धार्मिक माफिया, मिडिया माफिया. चिकित्सा माफिया, जगह जगह एंव समाज मे एक अलग डिपार्टमेंट तैयार होता जा रहा है जिसे तैयार होनें से कोई माई का लाल नहीं रोक सकता. गैरकानूनी कार्य कुशलतापूर्वक संपन्न करने की क्षमता रखने वालो का समूह माफिया कहलाता है ।
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक दल में सलंग्न कुछ चुनिंदा रसूखदारों का आशीर्वाद इन्हें प्राप्त होता है। रसूखदारों और माफियाओं के बीच समझदारीपूर्ण अलिखित लेकिन, विश्वसनीय करार होता है।माफिया समूह में संलग्न लोग बहुत उदारवादी होते हैं।धार्मिक,सामाजिक,शिक्षा,चकित्सा और राजनीतिक संगठनों को आर्थिक मदद देने के लिए, दिल खोलकर दान देते हैं।भारतीय दर्शनशास्त्र में दान का बहुत महत्व है,”दान देने से पुण्य प्राप्त होता है।”एक कहावत रूपी मान्यता है”दान में प्राप्त गाय के दांत नहीं गिनते हैं”,ठीक इसी तरह दान में प्राप्त धन के स्रोत को नजरअंदाज ही करना चाहिए।यदि ऐसा नहीं किया तो गुप्तदान नामक शब्द महत्वहीन हो जाएगा।माफिया समूह ऐसा वृक्ष होता है,जिसकी जड़ें,मजबूत,गहरी और बहुत दूर तक फैली होती हैं यह माफिया नामकवृक्षधार्मिक,सामाजिक,सांस्कृतिक,संगठनो में सक्रिय लोगों के करकमलों द्वारा सींचा जाता है राजनीति इस वृक्ष का संरक्षण करती है। त्रुटियों का लाभ उठाना साहस पूर्ण कार्य है।नीति नियमो की त्रुटियों के कारण अपने अवैध कार्यो को वैध कर लेना कोई साधारण काम नहीं हैं, इसके लिए तेजतर्रार दिमाग होना चाहिए।जबतक भाग्य साथ देता है तबतक इस समूह के लोगों के पांसे पक्ष में पड़ते हैं,तबतक खेल में सीढ़ी- दर-सीढ़ी ही आते रहती है,लेकिन आख़री पायदान पर पहुँचने के मात्र दो कदम की दूरी पर अर्थात इठयावन पर साँप आ जाता है जो सीधे नीचे ले आता है।नीचे अर्थात जमीन मे गिराकर सब कुछ नेस्तनासबूत कर देता है।अपने देश का दर्शन शास्त्र कहता है, पाप का घड़ा एक न एक दिन फूटता ही है।महत्वपूर्ण बात इन माफिया समूहों के जो सरपरस्त होते हैं उन्हें सम्मान से भाई या डॉन कहा जाता है।यह जो भाई लोग होते हैं,इनका सभी राजनैतिक दलों के साथ भाई चारा होता है।कुछ अलौकिक लोग इसे कहावत वाले मौसेरे भाई का रिश्ता बतातें हैं। जब तक व्यवस्था में बैठे लोग माफियाओं से भेट स्वरूपमानधन सहर्ष प्राप्त करते रहेंगे तब तक माफिया समूह रहेगा। जों भी हो ये माफिया माफ़ी भी बड़े जल्दी मांग लेते है, यह इनकी कमजोरी नहीं बल्कि गुणवत्ता है. ये माफीवीर भी होते है, ये थोक मे माफी मांगते भी और माफी देते भी है बल्कि बाटते है. जों भी हो माफिया बनना आसान थोड़े ही है.