चोपना (बैतूल): बिजली विभाग की कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की खुली दुकान, किसानों की जेब से लाखों की लूट!
चोपना (बैतूल): बिजली विभाग की कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की खुली दुकान, किसानों की जेब से लाखों की लूट
बैतूल जिले की चोपना टप्पा तहसील में बिजली विभाग के कुछ कर्मचारियों ने असुविधा और परेशानी बांटने के साथ-साथ कालाबाजारी और भ्रष्टाचार का खुला खेल शुरू कर रखा है। पिछले दो सालों में सैकड़ों किसानों से टी.सी. कनेक्शन के नाम पर 12-12 हजार रुपये वसूले गए, लेकिन रसीद देने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। नतीजा? ऊर्जा विभाग की सोलर पैनल योजना का लाभ इन किसानों तक पहुंचा ही नहीं। हर किसान को सीधा करीब 4.5 लाख रुपये का चूना लगा, क्योंकि इतनी राशि की भरपाई विभाग खुद करता।
मुख्यमंत्री का “5 रुपये में बिजली कनेक्शन” का जुमला यहां मुंहजबानी साबित हुआ। किसानों से दस से पंद्रह हजार रुपये तक वसूली की गई। ट्रांसफार्मर दुरुस्त करने या बदलने के नाम पर गरीब किसानों से 30-30 हजार रुपये ऐंठे गए। गांव में बिजली गुल हो जाए तो हर घर से दो-दो सौ रुपये का कलेक्शन किया जाता है, तभी जाकर लाइन ठीक होती है। बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी घर अथवा खेत की बिजली काट दी जाती है लोगों की मोटर पम्प उठा लिया जता है यह सब आउटसोर्स कर्मचारियों ( अकुशल मजदूर ) के जरिए कराया जा रहा है। लोग इन्हे लाइनमेंन समझ बैठें है. तार मिस्त्री की परीक्षा पास कर चुके अधिकारीयों के मार्ग दर्शन मे इन्हे काम करना होता है. यह अपने मन से किसी की बिजली नहीं काट सकते, मोटर पम्प नहीं उठा सकते, वसूली नहीं कर सकते किन्तु सब कर रहे है
सवाल ये है कि इस भ्रष्ट तंत्र में अधिकारी कहां हैं? क्या यही विकास है? जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को अपने हितों की रक्षा के लिए चुना था, वे चुनाव तक ही साथ निभाकर गायब हो गए। अब जनता चुप्पी तोड़ रही है। शिकायतें दर्ज हो रही हैं और सार्वजनिक भी की जा रही हैं। धर्मपुर की घटना पर आउट सौर्स कर्मचारी सुभाष हलदार ने अवैध तार हटावाये इसके बावजूद अब भी जाल बना हुआ हुआ है, बिजली विभाग की इस काली दुकान पर अब सवालिया निशान लग चुका है। जिसका जवाब इन लोगों देना मुश्किल हो रहा है. शिकायतकर्ताओं का कहना है निराकरण के लिए जिला स्तर के बड़े अधिकारीयों से इस विषय पर जल्द शिकायत की जावेगी. भ्र्ष्टाचार से वसूला पैसा किसानों को वापस करवा कर कार्यवाही भी करवाई जाना चाहिए..